Saturday, June 3, 2017

भारतीय सिविल सेवा परीक्षा विद्यार्थियों के साथ सबसे बड़ा धोखा


मेरे बिचार से भारत जैसे देश में सिविल सेवा परीक्षा विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा धोखा है।
अब जरा गौर करें कि कितने विद्यार्थी इस परीक्षा में बैठते हैं।  उनका कितना समय इसमें लगता है।  कितने लोगों का  प्रयास सार्थक होता है।  कुल समय का कितना प्रतिशत समय सार्थक होता है। उन विद्यार्थियों पर क्या गुजरती है जो सारा प्रयास करने के बावजूद असफल  हो जाते हैं।
साथ के अभ्यर्थी जो तुलनात्मक रूप से कम  सक्षम होते हुए भी आई  ए  एस  बन जाते हैं और दूसरे जो अच्छी जानकारी रखते हुए भी पूरी  जिंदगी घुट घुट कर जीते हैं।
इन सभी पहलुओं पर ध्यान देने से ऐसा लगता है कि इस सेलेक्शन प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की जरुरत है।




Sunday, May 7, 2017

आप पार्टी का कुकृत्य

जब से आप पार्टी का उद्भव हुआ है तभी से ऐसा लग रहा था की ये पार्टी बहुत जल्दी ही टूट जाएगी।
इस पार्टी का उद्भव केवल और केवल इस कारण हुआ कि  बीजेपी  ने कांग्रेस  को इतना कमजोर कर दिया कि कांग्रेस शून्य  पर आ गयी। जिसका लाभ सीधे तौर पर आप पार्टी को मिला। फिर इनकी प्राथमिकता  काम करने की न होकर दूसरों की बुराई करने की रही।
आज एक एक कर जो आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है उससे ये स्पष्ट दिख रहा है कि  इनके दिन लदने वाले हैं। इन्होने दूसरों की बुराई का जो कुकृत्य किया है वो इनके सर चढ़ कर बोल रहा है। 

Sunday, March 6, 2016

kanhaya ka lal salam

जे ऎन  यू  के  छात्र  नेता कन्हैया का लाल सलाम का नारा ऎसे  समय में हुआ है जब कम्युनिस्ट पार्टी अपना वर्चस्व  खो चुकी है। उपरोक्त तथ्य के आलोक में यदि गहराई से देखा जाये तो दो बिंदु दृष्टिगोचर हैं।

 पहला कन्हैया एक छात्र नेता के रूप में जे ऐन यू में पैदा हुए हैं जो लाल सलाम  का नारा लगा रहे हैं। दूसरे  ये नारे ऎसे समय में लगे हैं जब लाल सलाम का नारा अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। 

कन्हैया का भाषण, छात्रों के बीच तालियों की गड़गड़ाहट , प्राइम टाइम में जगह पा जाना, गैर भाजपाई पार्टियों द्वारा सर आँखों में बिठाकर पीठ थपथपाना आदि ऐसे समय में हो रहा है जब देश में कई अहम मुद्दे मुह बाये खड़ी है।  पूरे विश्व में 
शायद ही कोई ऐसा  देश होगा जिसमे अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इतना कोहराम मचा होगा। 

दरअसल कन्हैया की शिक्षा दीक्षा ऎसे दूषित वातावरण  में हुई है जहाँ राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर जहर पिलाया गया है। ये एक ओर जहाँ संविधान में आस्था की बात करते हैं वहीँ  अपने देश के पूर्ण बहुमत पाये  प्रधान मंत्री के लिए "तुम " की भाषा का प्रयोग करते हैं। ये तो छिछले स्तर की भाषा  है।  
मैं भी बिहार का ही हूँ।  सौम्य भाषा का प्रयोग बिहार के निवासियों की पहचान है।  हम बिहारी रिक्शा चलने वालों को भी "तुम" कहकर सम्बोधित नहीं करते। 
कन्हैया  का भाषण कॉलेज  में  भले ही तालियां बटोरता हो पर असली धरातल पर देश को कमजोर कर रहा है। एक तरफ जहाँ देश की समस्याओं की  चर्चा के लिए संसद में और मीडिया का टाइम जाया हो रहा है  वहीँ जनता इस अनावश्यक  बहस  से ऊब चुकी है।  देश का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। 
 कौन है  जो इसके लिए जिम्मेदार है ?

Tuesday, July 7, 2015

Preamble

इस ब्लॉग  द्वारा बिभिन्न समसामयिक सामाजिक  ेएवं  राजनैतिक मुद्दों पर हम अपने व्यक्तिगत  मंतव्य  दिया करेंगे  .    
वी  पी  मिस्रा
I would like to share my personal views through this blog on various concurrent social and political issues.

V P Mishra