सेवानिवृति के बाद की मनोदशा
एक व्यक्ति जब सेवानिवृत हो जाता है तो उसके जीवन में व्यापक बदलाव आता है। उसके जीवन के ३० - ३५ वर्षों की नियमित जीवन शैली अचानक बदल जाती है। एक शून्य सा आभाष होने लगता है। इसके लिए बहुत पहले से रिहर्सल होनी चाहिए।
हरेक व्यक्ति का प्रोफाइल अलग अलग होता है। कई लोग अपने सामाजिक दायित्य से निवृत नहीं हो पाते हैं तो कई लोग मकान जमीन आदि के लिटिगेशन के कारण परेशान हो जाते हैं। रिटायरमेंट में मिले फण्ड को सेफ्टी फण्ड के रूप में संजोग कर रखना भी एक कठिन कार्य है।
मेरे विचार से सभी सेवा निवृत व्यक्तियों के लिए अलग एक ट्रेनिंग होने चाहिए जिसमे सभी को एक्सपर्ट लोगों ट्रेनिंग मिले की अगली इनिंग में उन्हें कैसे जीवन यापन करना है।
एक व्यक्ति जब सेवानिवृत हो जाता है तो उसके जीवन में व्यापक बदलाव आता है। उसके जीवन के ३० - ३५ वर्षों की नियमित जीवन शैली अचानक बदल जाती है। एक शून्य सा आभाष होने लगता है। इसके लिए बहुत पहले से रिहर्सल होनी चाहिए।
हरेक व्यक्ति का प्रोफाइल अलग अलग होता है। कई लोग अपने सामाजिक दायित्य से निवृत नहीं हो पाते हैं तो कई लोग मकान जमीन आदि के लिटिगेशन के कारण परेशान हो जाते हैं। रिटायरमेंट में मिले फण्ड को सेफ्टी फण्ड के रूप में संजोग कर रखना भी एक कठिन कार्य है।
मेरे विचार से सभी सेवा निवृत व्यक्तियों के लिए अलग एक ट्रेनिंग होने चाहिए जिसमे सभी को एक्सपर्ट लोगों ट्रेनिंग मिले की अगली इनिंग में उन्हें कैसे जीवन यापन करना है।
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